Vat Savitri vrat 2018: जानें वट सावित्री व्रत का महत्व और पूजन का तरीका…

हिंदू धर्म में स्त्री और पुरुष के संबंध को बहुत ही पवित्र माना गया है. दोनों के पति-पत्नी स्वरूप को परिवार और समाज के लिए मर्यादा और सम्मान के रिश्ते में पिरोया जाता है. इस संबंध को इतना महत्व दिया जाता है यकीनन तभी स्त्री द्वारा उसके पति की लंबी उम्र की कामना करना भी इस धर्म का नियम रहा है. स्त्री अपने पति की लंबी उम्र के लिए कई तरह से पूजा-अर्चना करती है. इसमें कई बड़े अवसरों पर उसके लिए व्रत का प्रावधान भी है. इन्हीं में से एक है करवा चौथ और व्रत सावित्री. वट सावित्री व्रत में इसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं.

मान्यताएं
वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा कर पूजा करती हैं. कहते हैं कि गुरुवार को वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है. ऐसा माना जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस ले लिया था. इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर लेती हैं और सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार करती हैं. मान्यता के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने के बाद ही सुहागन को जल ग्रहण करना चाहिए.

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