SC/ST कानून पर फैसला देते वक्त आपातकाल था दिमाग में : न्यायमूर्ति गोयल

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में शुक्रवार को सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कानून से जुड़ी सुनवाई के समय व्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा सामने आने पर उनके दिमाग में नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलने के लिये आपातकाल के दौरान की गई गलतियां थीं.जस्टिस आदर्श गोयल ने फेयरवेल में SC/ST पर फैसले में उठे सवालों पर कहा कि ये फैसला मैंने दिया था. आम तौर पर जज फैसलों पर बोलते नहीं हैं पर मैं बोल सकता हूं. इसमें एक प्रावधान था कि इसमें आपको अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी. क्या किसी निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है? अगर ऐसा हो तो फिर यहां अदालतों का क्या काम?

यह भी पढ़ें: अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद LG अनिल बैजल ने ट्वीट कर कही यह बात… 


ADM जबलपुर केस में जो विरोधी फैसला था, जो कानून बन गया कि मनमानी गिरफ्तारी नहीं हो सकती, इस मामले में फैसला देते वक्त मेरे दिमाग में वही था. जब लोग अदालत आते हैं तो न्याय की आस में आते हैं यही वजह है कि हमें फैसले जल्द करने चाहिए. मैं ये कह सकता हूं कि हमारी न्याय व्यवस्था दुनिया में गौरवशाली है. हर सिस्टम में खामी होती है. हमारे सिस्टम को कमतर कम आंकिए. यहां तक कि ओबामा ने भी अमेरिका में सजा के सिस्टम की आलोचना की है. मैं चाहता हूं कि कानूनी क्षेत्र में देश दुनिया में सबसे आगे हो.

यह भी पढ़ें: CJI ही मास्टर ऑफ़ रोस्टर, SC ने कहा- दुनिया तेजी से बदल रही है लेकिन फंडामेंटल्‍स नहीं बदलेंगे

उन्होंने ही 20 मार्च को जस्टिस यू यू ललित के साथ फैसला दिया था कि SC/ST एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी ननहीं होगी. उन्होंने गुरुवार को जगन्नाथ पुरी मंदिर में दूसरे धर्म के लोगों कोप्रवेश पर विचार करने को कहा है. जस्टिस गोयल ने ही 498A दहेज प्रताड़ना मामले में ऑटोमेटिक गिरफ्तारी से रोक लगाई थी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 22 रह गई है जबकि जजों की तय संख्या 31 है.

टिप्पणियां

Leave a Comment