सीलिंग मामला : दिल्ली के मास्टर प्लान में संशोधन पर लगी रोक के आदेश में बदलाव

खास बातेंसरकार से तीन दिन तक लगातार आपत्तियों के लिए विज्ञापन देने को कहाकेंद्र ने कहा, संशोधन के नोटिफिकेशन पर रोक का फैसला सही नहींसंशोधन कानून के जरिए लोगों द्वारा चुने गए सांसदों को करना चाहिएनई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मास्टर प्लान 2021 में संशोधन के नोटिफिकेशन पर लगी रोक के आदेश में संशोधन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फिलहाल मास्टर प्लान में संशोधन के लिए आगे बढ़ने की इजाजत दे दी है. 6 मार्च को लगाई गई रोक के फैसले में संशोधन किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि  मास्टर प्लान में संशोधन के लिए 15 दिनों के भीतर जनता से आपत्तियां मांगी जाएं. कोर्ट ने सभी बड़े अखबारों में दस दिन के भीतर तीन दिन तक लगातार आपत्तियों के लिए विज्ञापन देने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने डीडीए को अवैध निर्माण की शिकायत के लिए प्रस्तावित मोबाइल एप को 16 दिनों के भीतर लांच करने को कहा है. कोर्ट ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे अफसरों को सस्पेंड करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. मामेल में 17 मई को सुनवाई होगी.

यह भी पढ़ें : सीलिंग मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दिल्ली में हालात सुधारने में काफी देर हो चुकी है


केंद्र और डीडीए की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मास्टर प्लान 2021 में संशोधन के नोटिफिकेशन पर रोक लगाने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही नहीं है. यह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में है कि वह जनहित में कानून लेकर आए. लेकिन कोर्ट इस तरह संशोधन पर रोक नहीं लगा सकता, जो कानून अभी बना नहीं है. कोर्ट कानून के लागू होने पर तो इस पर विचार कर सकता है लेकिन सिर्फ इसलिए रोक नहीं लगा सकता कि इसका दुरुपयोग हो सकता है. यह संशोधन कानून के जरिए लोगों द्वारा चुनकर संसद भेजे गए प्रतिनिधियों द्वारा किया जाना है. कोर्ट को संसद पर भरोसा करना चाहिए.

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ये ऐसा मामला है जिसमें किसी के अधिकारों का कोई हनन नहीं हुआ. कोर्ट ने ये गलत पूछा कि क्या संशोधन से पहले पर्यावरण संबंधी असर पर स्टडी की गई. किसी निजी इमारत को बनाने के लिए किसी पर्यावरण अनुमति की जरूरत नहीं है. सिर्फ 20000 वर्ग मीटर से ऊपर की इमारतों, मॉल आदि के लिए ही यह जरूरी है. मास्टर प्लान में संशोधन हो या न हो, यह पूरी तरह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में है.

यह भी पढ़ें : दिल्‍ली सीलिंग मामला: SC ने कहा- 1797 अवैध कॉलोनियों में निर्माण कार्यों पर लगे रोक, पूछा- 7 मंज़िला इमारत कैसे बनीं

वेणुगोपाल ने कहा कि देश की 80 फीसदी आबादी गांव में थी, अब 70 फीसदी रह गई है. रोजाना जातिवाद, अंधविश्वास आदि की खबरें आती हैं. लोग शहरों में बस रहे हैं. सरकार 300 मिलियन गरीबी से नीचे रहने वाले लोगों के लिए आधार योजना लाई है. उन्हें सीधे कल्याणकारी योजनाओं के जरिए लाभ पहुंचाया जा रहा है. कोर्ट को मास्टर प्लान के संशोधन पर लगी रोक को हटाना चाहिए. अगर कोर्ट चाहता है कि मिसयूज होने पर जुर्माना 1.5 गुना नहीं दस गुना हो, ये बात कार्यपालिका को बता दी जाएगी.

केंद्र और डीडीए की ओर से अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को अवैध निर्माण और अतिक्रमण से निपटने के लिए एक्शन प्लान भी सौंपा. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अवैध निर्माण को रोकने के लिए कठोर नियम ला रही है. इसमें अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी. नियम के तहत अगर अवैध निर्माण कराने में निगम और डीडीए के ऑफिसर शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ PC एक्ट और IPC की धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी.

टिप्पणियां

n_h

Leave a Comment